अब न कोई राह सूझती है,
न कोई रह्बर दिख रहा!
कहने की न हो हिम्मत,
फ़िर भी इबारत लिख रहा!!
कल तक भ्रष्टाचार मिटाने वाला,
शेर की खाल मे भेडिया दिख रहा !!अब न कोई.............
संसद और संविधान की आड मे,
हर कोई इधर -उधर छिप रहा !! अब न कोई.............
अब तो हमे अपनी राह बनानी है,
नौजवां कितना बेसब्र दिख रहा !! अब न कोई.............
ज्वालामुखी न कोई फ़ट पडे,
बोधिसत्व ये इबारत लिख रहा !!अब न कोई.............
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
न कोई रह्बर दिख रहा!
कहने की न हो हिम्मत,
फ़िर भी इबारत लिख रहा!!
कल तक भ्रष्टाचार मिटाने वाला,
शेर की खाल मे भेडिया दिख रहा !!अब न कोई.............
संसद और संविधान की आड मे,
हर कोई इधर -उधर छिप रहा !! अब न कोई.............
अब तो हमे अपनी राह बनानी है,
नौजवां कितना बेसब्र दिख रहा !! अब न कोई.............
ज्वालामुखी न कोई फ़ट पडे,
बोधिसत्व ये इबारत लिख रहा !!अब न कोई.............
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७









