ऐसा लगता है कि बात कल की ही है,
जब मैने अपनी बेटी को रुखसत किया !
बता सकता नहीं मैं कुछ भी आपको ,
कि यह चाक दिल मैने, कैसे-कैसे सिया !! ऐसा लगता है....
उसके रुखसार पर बहते हुए आँसू देख,
सोचा गम न कर,उसको मिल गया है पिया!! ऐसा लगता है ....
गले जब मेरे लगी,कलेज़ा मुँह को आ गया,
कह कुछ न पाया ,लगा वार दिल पर किया!! ऐसा लगता है....
अच्छी तालीम और दहेज़ देकर भी घबराता हूँ,
फ़िर भी उन्होने सीना उसका छलनी किया !! ऐसा लगता है.....
आज भी टेलीफ़ोन पर ,रोने की आवाज़ आती है
न जाने क्यूँ लगता है,किसी ने कुछ किया !! ऐसा लगता है...
अब तो सुबह,अखबार पढने से डर लगता है,
दहेज़-लोभियों ने,बेटी को तो नही जला दिया!!ऐसा लगता है....
आप नही समझेंगे, मै एक बेटी का बाप हूँ,
फ़िर क्यूँ उसे देवी का दर्ज़ा उन्होने है दिया !!ऐसा लगता है.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७