बुधवार, 18 अगस्त 2021
तालिबान
न जाने क्या क्या मुकाम अभी और देखने को मिलैंगे?
हवाई जहाज मे 130 की बजाय 640 खौफजदा इंसाँ मिलैंगे।।
मरना था टपक कर हवाई जहाज से यूँ तालिबानियों से डरैंगे।
गए थे रोज़ी रोज़गार करने ,
गवाँ बैठे बीवी की जान जो खुद बचैंगे।।
इस कदर खौफनाक मंजर न देखा कभी,खुदाया अपनो पै रहम क्या करैंगे?
बने हैं तालिब,न देखा मुँह मदरसों का,फिर जुल्म दोबारा यूं ही करैंगे।।
गुरुवार, 28 जनवरी 2021
कवि श्रीकृष्ण शर्मा (Kavi Shrikrishna Sharma): कवि बोधिसत्व कस्तूरिया की कविता - " जय हिंद "
कवि श्रीकृष्ण शर्मा (Kavi Shrikrishna Sharma): कवि बोधिसत्व कस्तूरिया की कविता - " जय हिंद ": जय हिंद जय हिंद का दिया जिसने उदघोष ! बेशक हो गया अब वो खामोश !! पर केवल उनका ख्याल भर दे जोश ! उनके पराक्रम पर ममता दे रही दोष !! क्यो &...
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