जिंदगी क्या है?.......
जिंदगी है तपते हुए रेत की तरह ,
जिंदगी है सूखे पड़े खेत की तरह ,
नहीं जिंदगी है भटके हुए प्रेत की तरह ! जिंदगी है क्या ?........
जिंदगी है एक ख्याल की तरह,
चल रही है युगों से बबाल की तरह ,
नही जिंदगी है अनकहे -सवाल की तरह !जिंदगी है क्या ?.......
कुछ के लिए जिंदगी एक तराना है ,
जिसे हर किसी को गुनगुनाना है ,
कुछ नये गीत हैं कुछ पुराना है !जिंदगी है क्या?.........
जिंदगी है एक शाम की तरह,
गटक रहे हैं लोग जाम की तरह ,
नहीं ! भुगत रहे हैं आफिस के काम की तरह !जिंदगी है क्या?........
जिंदगी है एक विश्वास की तरह ,
या नवजात शिशु के श्वास की तरह ,
नही ! जिंदगी है एक मकसद खास की तरह!जिंदगी है क्या?........
जिंदगी है एक नदी की तरह ,
जी रहे हैं ,एक सदी की तरह ,
नही यह है लिखी हुई बड़ी की !जिंदगी है क्या ?........
जिंदगी है दुधारी तलवार की तरह,
कभी नफरत,कभी प्यार की तरह ,
कभी अंधड़ तो कभी बयार की तरह!जिंदगी है क्या?.........
जिंदगी है एक चाँदनी की तरह ,
या फ़िर मधुर रागिनी की तरह ,
नही यह तो है ,नव-योवना कामिनी की तरह !जिंदगी है क्या?........
जिंदगी है एक फूल की तरह ,
क्यों चुभ रही है शूल की तरह ?
कुछ जी रहे हैं एक भूल की तरह!जिंदगी है क्या?.....
जिंदगी क्या एक भूल- भुलैयां है ?
जहाँ गहन अंधकार भी है और तारों की छैयां haइ ,
नही किसी की है यह सौत तो किसी की सैयां है !
जिंदगी है क्या ?.............
बोधी सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
मंगलवार, 20 जनवरी 2009
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