गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

नव वर्ष

जीवन एक संघर्ष है,

अनेको अवसाद और कुछ हर्ष है!

राहें आसान हो जाती हैं,

यदि साथी कोई आपका समदर्ष है!जीवन एक....

दिन,घडी ,साल, महीने,

यूँ ही बीते,फ़िर आ गया नव वर्ष है!जीवन एक.....

हर कोई यूँ ही दौड रहा,

फ़िर भी न जाने क्यूँ एक अपकर्श है! जीवन एक....

कुछ ऐसा करो इस साल,

सब कहें बदल रहा ,कुछ इस वर्ष है ! जीवन एक....

मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

इश्क के चर्चे

तेरे इश्क के चर्चे , अब सरे आम हो गये हैं ,

कल तक थे क्च्चे, अब पके आम हो गये है !

तेरी गली के कुत्ते ,जो भौंका किये थे मुझ पर,

अब तो उन्ही मे हम भी, गुमनाम हो गये हैं! तेरे इश्क ........

तुझे कालेज पँहुचा-पँहुचा, थक गया हूं मै भी,

आस्माँ को छूते अब, पैट्रोल के दाम हो गये हैं !तेरे इश्क .....

कभी मिलने का मौसम, बना ही डालो जानम,

अब तो अपने ही घर मे, बदनाम हो गये हैं ! तेरे इश्क .....

शादी के वास्ते पापा से, मिलने का है इरादा,

चक्कर लगा-लगा के,चक्के ही जाम हो गये हैं! तेरे इश्क ....

ग्रहस्थी चलाने के लिये,इक पहिये की है ज़रूरत,

बन जाओ तुम ही खानम, सुबह से शाम हो गये हैं!

तेरे इश्क के चर्चे , अब सरे आम हो गये हैं !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007 

गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

धरा की धरोहर

धरा की धरोहर हैं -हवा ,वृछ और पानी !

प्रदूषित होती जा रही ,इसकी यही कहानी !!
वेद और शास्त्रों में पूज्य,यह सब सनमानी !
भूल गए हमारे बच्चे ,होकर अति अभिमानी !!
वायु- प्रदूषण से ग्रसित ,घूम रहे श्वास के रोगी !
जल-प्रदूषण से त्रसित , पथरी-पीलिया के भोगी !!
वृछ काट-काट कर, पत्थर के जंगल बन रहे !
आक्सीज़न के दाता , गमलो में केवल पल रहे !!
कैसे हो जीवनदायी तत्वों का,पूरा संरक्चन ?
जब उसके रक्चक ही ,कर रहे उनका भक्चन !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७

रविवार, 5 दिसंबर 2010

जीवन एक मकान किराये का

जीवन एक मकान किराये का,

फ़िर यामे रहिबे को सुख कहे का! जीवन एक.....

कौन दिना नोटिस आ जावे,

कोऊ न जाने, फ़िरहूं घूमे इतराये सा! जीवन एक....

या जीवन मे आना है एक मानी,

नही किया कुछ, बेकार फ़िरै बौराये सा !जीवन एक.....

तन मिट्टी का,याही मे मिल जावेगा,

चौथेपन मे जागे से,का मिल पायेगा ! जीवन एक.....

धन-दौलत ,दुमहले, यहीं छुट जावेगा,

मानव-धर्म का भरम तभी टुट जायेगा !जीवन एक.......

या जीवन जब कछु नही कर पावेगा,

दूजी यौनी मे फ़िर,का तोप चलावेगा ! जीवन एक......

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७