गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

धरा की धरोहर

धरा की धरोहर हैं -हवा ,वृछ और पानी !

प्रदूषित होती जा रही ,इसकी यही कहानी !!
वेद और शास्त्रों में पूज्य,यह सब सनमानी !
भूल गए हमारे बच्चे ,होकर अति अभिमानी !!
वायु- प्रदूषण से ग्रसित ,घूम रहे श्वास के रोगी !
जल-प्रदूषण से त्रसित , पथरी-पीलिया के भोगी !!
वृछ काट-काट कर, पत्थर के जंगल बन रहे !
आक्सीज़न के दाता , गमलो में केवल पल रहे !!
कैसे हो जीवनदायी तत्वों का,पूरा संरक्चन ?
जब उसके रक्चक ही ,कर रहे उनका भक्चन !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७

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