बुधवार, 18 अगस्त 2021

तालिबान

न जाने क्या क्या मुकाम अभी और देखने को मिलैंगे? हवाई जहाज मे 130 की बजाय 640 खौफजदा इंसाँ मिलैंगे।। मरना था टपक कर हवाई जहाज से यूँ तालिबानियों से डरैंगे। गए थे रोज़ी रोज़गार करने , गवाँ बैठे बीवी की जान जो खुद बचैंगे।। इस कदर खौफनाक मंजर न देखा कभी,खुदाया अपनो पै रहम क्या करैंगे? बने हैं तालिब,न देखा मुँह मदरसों का,फिर जुल्म दोबारा यूं ही करैंगे।।

गुरुवार, 28 जनवरी 2021

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

ज्वालामुखी

अब न कोई राह सूझती है,
न कोई रह्बर दिख रहा!
कहने की न हो हिम्मत,
फ़िर भी इबारत लिख रहा!!
कल तक भ्रष्टाचार मिटाने वाला,
शेर की खाल मे भेडिया दिख रहा !!अब न कोई.............
संसद और संविधान की आड मे,
हर कोई इधर -उधर छिप रहा !! अब न कोई.............
अब तो हमे अपनी राह बनानी है,
नौजवां कितना बेसब्र दिख रहा !! अब न कोई.............
ज्वालामुखी न कोई फ़ट पडे,
बोधिसत्व ये इबारत लिख रहा !!अब न कोई.............
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

चन्द आशार





कुछ तो मौसम की रवानगी थी,

कुछ आपकी बातों की दीवानगी थी!

वरना हम यूं ही शायर न बन जाते,

वो तो जोशे-जवानी की मर्दानगी थी!!





हम तो राहे गर्दिश मे अकेले ही चले थे,

पता नही कौन-किस मोड पर साथ हो लिया?

और धीरे धीरे कारर्वाँ बनता चला गया!



मौहब्बत के मानिंद कोई शै नही ,

काश एक बार करके तो देखी होती!

नफ़रत से भी ज़्यादा दीवानगी है इसमे,

दिलो-जाँ निसार कर भी आँख नम नही होती!





तेरे हुस्न की रानाईयाँ

मेरे इश्क की रुस्वाईयाँ,

गर कभी थम भी जायें तो,

किसी ज़लज़ले का अह्सास होता है !



बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८००७

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

गरीब


कभी चिलचिलाती धूप मे,
किसी गरीब को नगें पाँव
चलते हुए देख एसी कार
मे बैठ्ने वाले ने पूछा,
"क्यों क्या तेरे पैर जलते नही?"
बोला "मालिक ,जानवरों के खुर होते हैं,
जो गर्म डाबर पर चलने से झुलसते नही!"
कभी दिसम्बर की सर्द रातों मे
खुले आसमान के नीचे,
फ़ुट्पाथ पर सोने वाले से
गर्म रजाई और हीटर मे
सोने वाले ने पूछा-
"क्यों बे मरने के लिये
यही फ़ुट्पाथ मिला है?"
बोला"हुज़ूर !हम तो कब के मर चुके हैं,
आप लोग अभी तलक यह क्यूं समझते नही?
तेज़ रफ़्तार मर्स्डीज़ बेंज़ से ट्क्कर मार
एक रईस ज़ादे ने पूछा -
"क्यॊं कया बहरा है?
कार की आवाज़ सुनाई नही देती,
मरने के लिये मेरी ही कार मिली है क्या?"
फ़टे हाल टीबी का मारा भिखारी बोला
ज़नाब! मरे हुए लोगों से शरीफ़ यूं उलझते नही !"
बोधिसत्व कस्तूरिया२०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

रविवार, 10 जुलाई 2011

दर्द का अह्सास

दर्द का  अह्सास
-------------------
दर्द का अह्सास ,
क्यूं कर कभी होता नही ?
प्यार की प्यास मे,
आज तक रोता नही !! दर्द का अह्सास..........
ज़ज़्बात मे बह जाये,
मैं ऐसा कोई सोता नही!!दर्द का अह्सास..........
है इल्म मुझको,बेमतलब
रिश्तों को ढोता नही !! दर्द का अह्सास..........
किसी को अपनाना कया,
मेरा कोई बेटा या पोता नही !! दर्द का अह्सास.....
हैं यही मेरी लाश की,
कपाल क्रिया पर दर्द होता नही !!दर्द का अह्सास....
बोधिसत कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७