शनिवार, 26 मार्च 2011

जलन

कभी जिन हाथों मे गुलाल होता था,


आज उन हाथों से हलाल होता है !

कभी आदमी आदमी का रह्बर था,

अब उसको मार कर भी नही रोता है!! कभी जिन.....

किसी के दर्द को कोई क्या समझेगा?

दर्द को वही समझे,जिसे दर्द होता है!! कभी जिन....

अब तो यार की ,मय्यत पर नही रोते,

शायद रोने से ,म्रतात्मा को दर्द होता है!! कभी जिन...

अब तो सब्र की भी इन्तहा हो गई,

मलने से रंग,जलन का अह्सास होता है!! कभी जिन...

जलन घर कर गई ,हमारे आपके भीतर,

जलन का ये कफ़न,आदमी ताउम्र ढोता है!! कभी जिन......

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

शनिवार, 19 मार्च 2011

Lets play holi (full vid)

होरी

मन मे फ़ूट रहा हो ज्वार

रंगो की ऊपर से पडे फ़ुहार!

भग का रंग चढा हो चकाचक,

आँगन मे खुशियों का त्योहार!

इसको ही क्या कहते हैं?

होरी मे हुरियारों का प्यार!!

मन बासंती हो जाता है ,

जब कही देखी भीगी नार !!

बूढों की बत्ती गुल हो जावे,

देख जवानी का श्रंगार !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

रविवार, 13 मार्च 2011

किस-किस से दोस्ती निभायें

किस-किस से दोस्ती निभायें ?


और किस-किस से यारी ?

हमको तो लगती है,

बेवफ़ा दुनिया यह सारी !!किस-किस.....

जिसको भी अपना कहा ,

वो बेवफ़ा निकला !

कभी हम थे बेबस,

कभी उनकी थी लाचारी!! किस-किस.....

उनकी हर अदा पर,

हमने दुनिया निसार दी !

हो गये वो बेवफ़ा,

जब आई उनकी बारी !! किस-किस.......

अब तो नफ़रत सी हो गई,

मुहब्बत के नाम से!

उनकी दोस्ती थी झूठी ,

कयूंकर निभाते यारी !! किस-किस.....

जवानी का था ज़लज़ला,

बह गये थे जिसमे!

बुढापे मे आकर,

उतर गई सारी खुमारी !! किस-किस.....

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

होली




जब लिखी कहानी वि्धाता ने इन्सान की ,

क्यू लिखी यह दुरगति उसने जापान की !! जब लिखी....

होली हम गर खेलते है, क्या भुला पायेंगे?

११ मार्च २०११ की होली उस भगवान की !! जब लिखी.....

भूक्म्प और सूनामी क्यूं एक साथ लिखी?

यह तो प्रतीत होती है कल्पना शैतान की!! जब लिखी ......

कलियुग मे बेशक पाप का घडा भर गया,

पर बेरहमो की बलि,है गल्ती भगवान की!! जब लिखी.....

आज मै स्वच्छ्न्द हू ,यह कहने के लिये,

तुम ही सुधारो अब , नियति भगवान की!! जब लिखी...

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

शनिवार, 5 मार्च 2011

दिल की ख्वाहिशें

दिल की ख्वाहिशों को ,कहां तक अंजाम दूं ?

हँस के मिलती हो ,पता नही इसे क्या नाम दूं !! दिल की.....

मुलाकातें बहुत हो चुकीं हैं अब तलक,

सोचता हूं ,इसे अब कोई मुक्क्मिल मुकाम दूं !! दिल की .........

नज़रों से पिलाए है तुमने,जाम लाखों,

मन मे आता है कि,तुम्हे कोई अच्छा ईनाम दूं !! दिल की........

सब्र का पैमाना छलक जाने से पहले,

हसरत है कि इस दिल को भी, कुछ आराम दूं !! दिल की........

कब से दिल मे अरमां दबाए बैठा हूं ,

तुम कभी हाँ कहोगी,या मैं तुम्हे यह पैगाम दूं !! दिल की......

है तमन्ना इस दिले आशना की यह,

दूर रहो या पास हो, प्यार तुझे सुबह शाम दूं !! दिल की .......

हसरतों की दुनिया मेरी आबाद हो ,

तुम कहो तो अब, एलाने-मुह्ब्बत सरेआम दूं !! दिल की .....

सरफ़िरों ने कर दिया बदनाम तुमको,

हर तरफ़ से आती है सदा,मैं ही तुझे नाम दूं !! दिल की.......


बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७