शनिवार, 19 मार्च 2011

होरी

मन मे फ़ूट रहा हो ज्वार

रंगो की ऊपर से पडे फ़ुहार!

भग का रंग चढा हो चकाचक,

आँगन मे खुशियों का त्योहार!

इसको ही क्या कहते हैं?

होरी मे हुरियारों का प्यार!!

मन बासंती हो जाता है ,

जब कही देखी भीगी नार !!

बूढों की बत्ती गुल हो जावे,

देख जवानी का श्रंगार !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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