किस-किस से दोस्ती निभायें ?
और किस-किस से यारी ?
हमको तो लगती है,
बेवफ़ा दुनिया यह सारी !!किस-किस.....
जिसको भी अपना कहा ,
वो बेवफ़ा निकला !
कभी हम थे बेबस,
कभी उनकी थी लाचारी!! किस-किस.....
उनकी हर अदा पर,
हमने दुनिया निसार दी !
हो गये वो बेवफ़ा,
जब आई उनकी बारी !! किस-किस.......
अब तो नफ़रत सी हो गई,
मुहब्बत के नाम से!
उनकी दोस्ती थी झूठी ,
कयूंकर निभाते यारी !! किस-किस.....
जवानी का था ज़लज़ला,
बह गये थे जिसमे!
बुढापे मे आकर,
उतर गई सारी खुमारी !! किस-किस.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
और किस-किस से यारी ?
हमको तो लगती है,
बेवफ़ा दुनिया यह सारी !!किस-किस.....
जिसको भी अपना कहा ,
वो बेवफ़ा निकला !
कभी हम थे बेबस,
कभी उनकी थी लाचारी!! किस-किस.....
उनकी हर अदा पर,
हमने दुनिया निसार दी !
हो गये वो बेवफ़ा,
जब आई उनकी बारी !! किस-किस.......
अब तो नफ़रत सी हो गई,
मुहब्बत के नाम से!
उनकी दोस्ती थी झूठी ,
कयूंकर निभाते यारी !! किस-किस.....
जवानी का था ज़लज़ला,
बह गये थे जिसमे!
बुढापे मे आकर,
उतर गई सारी खुमारी !! किस-किस.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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