रविवार, 13 मार्च 2011

किस-किस से दोस्ती निभायें

किस-किस से दोस्ती निभायें ?


और किस-किस से यारी ?

हमको तो लगती है,

बेवफ़ा दुनिया यह सारी !!किस-किस.....

जिसको भी अपना कहा ,

वो बेवफ़ा निकला !

कभी हम थे बेबस,

कभी उनकी थी लाचारी!! किस-किस.....

उनकी हर अदा पर,

हमने दुनिया निसार दी !

हो गये वो बेवफ़ा,

जब आई उनकी बारी !! किस-किस.......

अब तो नफ़रत सी हो गई,

मुहब्बत के नाम से!

उनकी दोस्ती थी झूठी ,

कयूंकर निभाते यारी !! किस-किस.....

जवानी का था ज़लज़ला,

बह गये थे जिसमे!

बुढापे मे आकर,

उतर गई सारी खुमारी !! किस-किस.....

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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