शुक्रवार, 13 मई 2011

चन्द आशार



एक चाँद के टुकडे से,ऐसी बात हुई ,
वो रात ,चाँद सितारों के साथ हुई !
हम भूल गयेप्यार मे,ज़िन्दगी को,
क्यूं मेरी ज़िन्दगी,और के साथ हुई !!

इश्क मे कभी जिया या मरा नही जाता,
इसलिये किसी को मज़बूर् नही किया जाता !
वो और होंगे ,जो मर गये कभी प्यार मे,
क्योंकि किसी और को मरना नही सिखाता !!

ज़िन्दगी सरे आम बदनाम कर गई ,
वो ही आज हमे ,यूँ गुमनाम कर गई!
हम कम नही थे,तेरे प्यार मे ज़ालिम,
ये सलाहियत ही हमे बदनाम कर गई!!

तेरी गली की हवा,आज भी खुश्बू लगती है,
चाँद -सितारेकी रात भी अधूरी सी लगती है!
प्यार मे हम मर के भी यारो, नही मर सके,
तेरी हर बात ,ज़िन्दगी से अच्छी  लगती है !!

तेरी प्यारी नज़र ने, ऐसा काम कर दिया ,
मुझे सारे जहाँ मे,इस कदर बदनाम कर दिया !
वो और थे जो खुद खब गये इस इश्क मे ,
ऐ मेरे गालिब ,मरना भी इश्क सरेआम कर दिया!!

जान से ज़्यादा ज़िन्दगी ने हमे बपर्दा किया,
ऐ कफ़न तूने मुझे शर्मिन्दा क्यूं कर दिया ?
गर मर भी जाते ,तेरे प्यार मे क्या गम,
तू ने ही हर जगह शर्मिन्दा क्यूँ कर दिया !!

रविवार, 8 मई 2011

"माँ"


माँ
---
मानव का पहला समबोधन "माँ" है!
पीडा का हर  उदबोधन    "माँ है !!
जिस पर नत मस्तक पराक्रमी सब,
उस अबला का अवलम्बन  "माँ"है!!
स्र्ष्टी के हर प्राणी पर अधिकार उसे,
जीवन दात्री का अभिनन्दन "माँ"है!!
प्रतिपल,प्रति छण पूज रहा जिसको,
मानव का निश्चित संवर्धन "माँ" है!
भारतीय संस्क्रति का है यह ह्रास  ,
जन्म अधर मे लटका ,वह"माँ" है!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७