शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010
होली
होलिका का हो दहन ,
भक्त प्रह्लाद का हो स्मरण !
हिरण्य कश्यप का हो मान- मर्दन ,
चारों ओर हो रहा हुरियारों का क्रंदन !
रंगों से सराबोर हो तन-मन ,
झूम उठी बगिया और चमन !
है येही नव संवत्सर का अभिनन्दन'!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा agraa282007
भक्त प्रह्लाद का हो स्मरण !
हिरण्य कश्यप का हो मान- मर्दन ,
चारों ओर हो रहा हुरियारों का क्रंदन !
रंगों से सराबोर हो तन-मन ,
झूम उठी बगिया और चमन !
है येही नव संवत्सर का अभिनन्दन'!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा agraa282007
रविवार, 21 फ़रवरी 2010
क्यों बनाया रिश्ता ?

क्यों बनाया उसने रिश्ता ,हमे भुलाने को ?
बरस बीस जाया किये,उसे अपना बनाने को !!
वो भी क्या दिन थे,फ़क़त लुभाने को !
कांधेका दिया सहारा,हमे सुलाने को !!क्यों ..........
एक दर्द दे दिया ,हमे रुलाने को !
ता ज़िंदगी कोशिश किये, उसे भुलाने को !! क्यों ........
मोहब्बत -औ- गम हमारे,मज़ा आ रहा ज़माने को !
हो चूका यह मज्हनू ,पत्थर से मरो इस दीवाने को !! क्योँ .......
इस ज़िन्दगी में हैं ,कई गम बताने को !
लोग आते हे सिर्फ ,हसने या फिर रुलाने को !!क्यों .........
उसने तो चुटकी में किया ,किनारा हमे सताने को!
हमने छुपाली दास्ताने -मोहब्बत,गुनगुनाने को !! क्यों......
अँधेरा बहुत किया ,उसने हमे डराने को !
हमने किये हैं चिरागां रौशन ,फिर दिवाली मनाने को !! क्यों.....
बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
बुधवार, 10 फ़रवरी 2010
जिंदगी
ऊबड़- खाबड़ रास्तों पर चलना ही तो ज़िन्दगी है !
तहे दिल से करे कोई सिजदा ,वही तो बंदगी है !!
गमे-राहमें कोई यूंही मिले, और गर बिछुड़ जाये !
फिर उससे मिलने को दिल करे,येही तो तिस्नगी है !!ऊबड़ -खाबड़ ........
राह में साथ चलने की गुज़ारिश करते हैं लाखों ,
पर चंद कदम साथ चलकर ,मुड जाये ,येही तो दिल्लगी है !! ऊबड़ -खाबड़ ......
प्यार करने को बांह में भर ले ,चूम ले -गिला नहीं !
पर प्यार में व्यभिचार करे ,यह ही तो दरिंदगी है !!ऊबड़- खाबड़ .......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा agra282007
तहे दिल से करे कोई सिजदा ,वही तो बंदगी है !!
गमे-राहमें कोई यूंही मिले, और गर बिछुड़ जाये !
फिर उससे मिलने को दिल करे,येही तो तिस्नगी है !!ऊबड़ -खाबड़ ........
राह में साथ चलने की गुज़ारिश करते हैं लाखों ,
पर चंद कदम साथ चलकर ,मुड जाये ,येही तो दिल्लगी है !! ऊबड़ -खाबड़ ......
प्यार करने को बांह में भर ले ,चूम ले -गिला नहीं !
पर प्यार में व्यभिचार करे ,यह ही तो दरिंदगी है !!ऊबड़- खाबड़ .......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा agra282007
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010
राजनीती
पहले हम धर्म-जाति,भाषा के नाम पर बंट रहे थे !
अब अपने स्वतंत्र भारत में ,प्रांतीयता के नाम बंट रहे हैं !!
इधर तो हम दशहरे पर ,गली मोहल्ले में रावण जला रहेहें !
पर raj ठाकरे सरीखे रावण ,राजनीती ki दूकान चला रहे हैं !!
क्या दीपावली par आप,, दीप प्रज्ज्वलित कर संतुष्ट हैं ?
जो लोग औरों के घर जला रहे हैं ,वे कितने दुष्ट हैं !!
हाय राजनीती कितनी ,बौनी और ओछी हो गई !
धर्म,संस्क्रति और प्रांतीयता से यह छोछी ho गई !!
बोधसत्व कस्तूरिया 202 नीरव निकुंज सिकंदरा २८२००७
अब अपने स्वतंत्र भारत में ,प्रांतीयता के नाम बंट रहे हैं !!
इधर तो हम दशहरे पर ,गली मोहल्ले में रावण जला रहेहें !
पर raj ठाकरे सरीखे रावण ,राजनीती ki दूकान चला रहे हैं !!
क्या दीपावली par आप,, दीप प्रज्ज्वलित कर संतुष्ट हैं ?
जो लोग औरों के घर जला रहे हैं ,वे कितने दुष्ट हैं !!
हाय राजनीती कितनी ,बौनी और ओछी हो गई !
धर्म,संस्क्रति और प्रांतीयता से यह छोछी ho गई !!
बोधसत्व कस्तूरिया 202 नीरव निकुंज सिकंदरा २८२००७
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