
क्यों बनाया उसने रिश्ता ,हमे भुलाने को ?
बरस बीस जाया किये,उसे अपना बनाने को !!
वो भी क्या दिन थे,फ़क़त लुभाने को !
कांधेका दिया सहारा,हमे सुलाने को !!क्यों ..........
एक दर्द दे दिया ,हमे रुलाने को !
ता ज़िंदगी कोशिश किये, उसे भुलाने को !! क्यों ........
मोहब्बत -औ- गम हमारे,मज़ा आ रहा ज़माने को !
हो चूका यह मज्हनू ,पत्थर से मरो इस दीवाने को !! क्योँ .......
इस ज़िन्दगी में हैं ,कई गम बताने को !
लोग आते हे सिर्फ ,हसने या फिर रुलाने को !!क्यों .........
उसने तो चुटकी में किया ,किनारा हमे सताने को!
हमने छुपाली दास्ताने -मोहब्बत,गुनगुनाने को !! क्यों......
अँधेरा बहुत किया ,उसने हमे डराने को !
हमने किये हैं चिरागां रौशन ,फिर दिवाली मनाने को !! क्यों.....
बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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