शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

राजनीती

पहले हम धर्म-जाति,भाषा के नाम पर बंट रहे थे !
अब अपने स्वतंत्र भारत में ,प्रांतीयता के नाम बंट रहे हैं !!
इधर तो हम दशहरे पर ,गली मोहल्ले में रावण जला रहेहें !
पर raj ठाकरे सरीखे रावण ,राजनीती ki दूकान चला रहे हैं !!
क्या दीपावली par आप,, दीप प्रज्ज्वलित कर संतुष्ट हैं ?
जो लोग औरों के घर जला रहे हैं ,वे कितने दुष्ट हैं !!
हाय राजनीती कितनी ,बौनी और ओछी हो गई !
धर्म,संस्क्रति और प्रांतीयता से यह छोछी ho गई !!
बोधसत्व कस्तूरिया 202 नीरव निकुंज सिकंदरा २८२००७

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