रविवार, 24 जनवरी 2010

गणतंत्र


गणतंत्र की कहानी ,तुमको है सुनानी !

स्वतंत्रता की गाथा ,आगे थी बढ़ानी !!

बिन संविधान,होती रहेगी मनमानी !

इसलिए संविधान की,ज़रुरत थी आनी !!

छोटे-छोटे राज्यों की,पहचान थी मिटानी !

एक गणतंत्र बनाने की, सबने थी ठानी !!

अन्य देशों के ,संविधानों का निचोड़ा पानी !

भारतीय संविधान की,छवि उभर के मानी!!

मूल अधिकारों ,नीति-निर्देशक सिद्धांत की,

मंजिल हमको , हर हाल में है पानी !!

स्वंतंत्रता,समानता,सदभाव का बहेगा निर्मल पानी !

सम्रेद्ध ,सुद्रढ़ भारत की ,छवि विश्व में है बनानी !!

२६ जनवरी १९५० को कर संविधान लागू !

नव भारत के निर्माण की लौ थी जलानी !!

बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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