मन जब आह्लादित हो,तब कविता बनती है!
जब मन आह़त हो,तब कविता बनती है !!
जब बारिश में फूल खिले हों ,तब कविता बनती है !
जब अंतस में शूल चुभे हों ,तब कविता बनती है !!
जब प्रेयसी मौन निमंत्रण दे, तब कविता बनती है !
जब प्रेयसी मनसे निष्कासन दे ,तब कविता बनती है !!
जब आंगन में किलकारी गूंजे ,तब कविता बनती है !
जब बेटी बिदा की बारी हो ,तब कविता बनती है !!
जब सावन की बौछार पड़े ,तब कविता बनती है !
जब सीमा पर गोली की मार पड़े,तब कविता बनती है !!
जब मन में उदगार उठे , तब कविता बनती है !
पता नही कब मन में ज्वार उठे ,तब कविता बनती है !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
रविवार, 12 अप्रैल 2009
शनिवार, 11 अप्रैल 2009
गाँधीजी

अब तो केवल नोटों पर छपते हैं गांधीजी।
कौन कहे और कौन सुने कि राष्ट्रपिता हैं गांधीजी!!
समय बीत गया की शान्ति दूत हैं गांधीजी !
बातअहिंसा की बेमानी-भूल गए सब गांधीजी!!
देश और समाज पर आँसू बहाते गांधीजी।
नाम उन्ही का बदनाम कर रहे गांधीजी!!
उपवास रखा था शंतिहेतु,अब हाथ काट रहे एक गांधीजी।
क्या अगली पीढी को ज्ञान दिखायेंगे यह गांधीजी ?
अब तो शर्म करो ,या डूब मरो ओह गांधीजी।
गाँधी को ही बदनाम कर रहे हैं नए नए यह गांधीजी !!
बोधिसत्वकस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
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