गुरुवार, 30 सितंबर 2010

फैसला

 बाढ की विभीषिका मे सब कुछ बह गया,

आपसी बैर और वैमनस्य फ़िर भी रह गया!

जब राम की नगरी मे ,मर्यादाये टूट्ती है ,

तब आस्थाओं की सीमाएं पीछे छूटती हैं!!

राम-रहीम के देश मे धार्मिक उन्माद नही होगा

तभी सभ्यता और संस्क्रति का विकास होगा !!

किसी फ़ैसले से भाई- भाई से अलग नही होगा,

भारत माँ की शपथ उससे कोई बिलग नही होगा!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा २८२००७

बुधवार, 29 सितंबर 2010

बौस छुट्टी पर है?

आज फ़िर कुछ होना है,

किसी के घर खुशी,

किसी के घर रोना है ! आज फ़िर कुछ....

सुबह से इसी उधेड बुन मे,

कभी कुछ भूल जाता हूं,

पर आफ़िस पहुंच,

खुशी से फ़ूल जाता हूं! आज फ़िर कुछ....

आज बौस छ्ट्टी पर है,

कमैन्ट्री सुनेगे ,सर्फ़िगं करेंगे!

किसी छोरी से छोरी,

बन ढेर सारी बातें करेंगे! आज फ़िर कुछ.....

प्रेम की पींगे बढेंगी,

पर क्या पता उधर भी

बौस आज छुट्टी पर हो! आज फ़िर कुछ..
बोधिसत्व सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

राम- जुहार

राम हमारे खुदा तुम्हारे यह क्या पागलपन है?

राम जुहार बस बनी रहे ,यह सच्चा जीवन है!

कभी मुह्ब्ब्त मे किसी को अपना बनाकर देखो,

कभी राम-लला को भी, मस्ज़िद मे बैठाकर देखो!

सुबह-शाम करते थे हम, आपस मे प्यार से बातें,

अब क्यों करने लगे हैं,आपस मे तकरार की बातें?

राजनीत और धार्मिक-क्ट्टर पथं मे क्या धरा है?

जो जहां रहता ,गगन उसी का और उसी की धरा है!!

गावं-देश को मत एक-दूजे के, खूं से लाल करो तुम,

फ़ैसला कुछ भी आये,सारे गगन मे गुलाल भरो तुम!

दुनिया मे अब मज़हब का, नाम बदनाम न होने पाये,

सच्चा मज़हब वो ही है , भटके हुओं को राह दिखाये!!

राम-रहीम के देश मे ,होंगी नही तकरार की बातें,

सगं-सगं पले-बडे हुये ,होंगी बस अब प्यार की बातें!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७ मो:९४१२४४३०९३

बुधवार, 22 सितंबर 2010

kisaan

उनके दर्द को कौन समझे?

दो दिन से बच्चों ने रोटी खाई नही,

मां होकर भी उसे

रुलाई आई नही!!

कभी सूखे ने,

फ़सल तबाह कर दी!

कभी बाढ ने

बिल्कुल स्वाह कर दी!!

अब बात खेतों के ,

अधिग्रहण की है !

जीवन पर लगने वाले

पूर्ण ग्रहण की है!!

इसीलिये रोने के बज़ाय,

लाठी उसने उठाई है!

प्रजातन्त्र मे भी,

शासक-शासित मे

कितनी बडी खाई है!!

शासक तो करोडों से

महल बना रहा है!

शसित पुश्तैनी ज़ायदाद

के लिये अपना खून बहा रहा है!!

वैसे हमारे देश मे,

प्रजातान्त्रिक सरकार है!

सम्पत्ति हमारा मौलिक अधिकार है!

इसीलिये विकास के नाम पर,

गरीबों पर पड रही मार है!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७











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शनिवार, 18 सितंबर 2010

दर्द

कभी-कभी गर्मी मे भी मौसम सर्द होता है,
किसी के भी आंसू देख दिल मे दर्द होता है!
ज़ख्म को जितना भी छुपाना चाहो तुम,
पर अपनो के सामने ही वो बेपर्द होता है !! कभी- कभी.......
खुशियां हैं तो लाखों दोस्त साथ होते हैं,
पर गम मे भी साथ दे,वो हमदर्द होता है !! कभी- कभी......
खुशी मे तो बियांवां भी बागवां लगता है,
पर गम मे बागवां भी गुबारे-गर्द होता है !! कभी-कभी .......

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७