बाढ की विभीषिका मे सब कुछ बह गया,
आपसी बैर और वैमनस्य फ़िर भी रह गया!
जब राम की नगरी मे ,मर्यादाये टूट्ती है ,
तब आस्थाओं की सीमाएं पीछे छूटती हैं!!
राम-रहीम के देश मे धार्मिक उन्माद नही होगा
तभी सभ्यता और संस्क्रति का विकास होगा !!
किसी फ़ैसले से भाई- भाई से अलग नही होगा,
भारत माँ की शपथ उससे कोई बिलग नही होगा!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा २८२००७


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