गुरुवार, 30 सितंबर 2010

फैसला

 बाढ की विभीषिका मे सब कुछ बह गया,

आपसी बैर और वैमनस्य फ़िर भी रह गया!

जब राम की नगरी मे ,मर्यादाये टूट्ती है ,

तब आस्थाओं की सीमाएं पीछे छूटती हैं!!

राम-रहीम के देश मे धार्मिक उन्माद नही होगा

तभी सभ्यता और संस्क्रति का विकास होगा !!

किसी फ़ैसले से भाई- भाई से अलग नही होगा,

भारत माँ की शपथ उससे कोई बिलग नही होगा!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा २८२००७

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