राम हमारे खुदा तुम्हारे यह क्या पागलपन है?
राम जुहार बस बनी रहे ,यह सच्चा जीवन है!
कभी मुह्ब्ब्त मे किसी को अपना बनाकर देखो,
कभी राम-लला को भी, मस्ज़िद मे बैठाकर देखो!
सुबह-शाम करते थे हम, आपस मे प्यार से बातें,
अब क्यों करने लगे हैं,आपस मे तकरार की बातें?
राजनीत और धार्मिक-क्ट्टर पथं मे क्या धरा है?
जो जहां रहता ,गगन उसी का और उसी की धरा है!!
गावं-देश को मत एक-दूजे के, खूं से लाल करो तुम,
फ़ैसला कुछ भी आये,सारे गगन मे गुलाल भरो तुम!
दुनिया मे अब मज़हब का, नाम बदनाम न होने पाये,
सच्चा मज़हब वो ही है , भटके हुओं को राह दिखाये!!
राम-रहीम के देश मे ,होंगी नही तकरार की बातें,
सगं-सगं पले-बडे हुये ,होंगी बस अब प्यार की बातें!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७ मो:९४१२४४३०९३


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