गुरुवार, 23 सितंबर 2010

राम- जुहार

राम हमारे खुदा तुम्हारे यह क्या पागलपन है?

राम जुहार बस बनी रहे ,यह सच्चा जीवन है!

कभी मुह्ब्ब्त मे किसी को अपना बनाकर देखो,

कभी राम-लला को भी, मस्ज़िद मे बैठाकर देखो!

सुबह-शाम करते थे हम, आपस मे प्यार से बातें,

अब क्यों करने लगे हैं,आपस मे तकरार की बातें?

राजनीत और धार्मिक-क्ट्टर पथं मे क्या धरा है?

जो जहां रहता ,गगन उसी का और उसी की धरा है!!

गावं-देश को मत एक-दूजे के, खूं से लाल करो तुम,

फ़ैसला कुछ भी आये,सारे गगन मे गुलाल भरो तुम!

दुनिया मे अब मज़हब का, नाम बदनाम न होने पाये,

सच्चा मज़हब वो ही है , भटके हुओं को राह दिखाये!!

राम-रहीम के देश मे ,होंगी नही तकरार की बातें,

सगं-सगं पले-बडे हुये ,होंगी बस अब प्यार की बातें!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७ मो:९४१२४४३०९३

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