शनिवार, 25 जून 2011

बुढापा


बुढापा
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बुढापे ने दी है दस्तक, कभी खाँसता हूं ,कभी खकारता हूं !
अब अपने अनुभवों से ,आने वाली  पीढी को  सँवारता हूं !! बुढापे....

बेशक उन्हे  नसीहत ,फ़्ज़ीहत लगे, पर उन्हे नकारता हूं !
अब बस गोली और गाली है, फ़िर भी भूखे पेट ड्कारता हूं!! बुढापे....

बच्चों की झिडकी मिलती है, फ़िर भी उन्ही को पुकारता हूं !
घर मे बाल - बच्चों से अनबन पर उन्ही को धिक्कारता हूं !!बुढापे...
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आते हैं  नन्हे -मुन्ने, नाती -पन्थी ,बस उन्हे पुचकारता हूं !
लौट आता है बचपन ,कभी गुन गुनाता , कभी चिंघाडता हूं !!बुढापे...
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७



रविवार, 12 जून 2011

रिश्ते


अब लोग रिश्तों को कहाँ पालते है?
शादी -ब्याह पर झूठी हँसी बिखेर,
नई कहानी बना जल्द से जल्द ,
घर भागने को प्रथाओं को टालते हैं! अब लोग .........
केवल अपने ही अपने होते है,
बाकी तो केवल सपने होते हैं,
क्योंकि ऐसे रिश्ते बेवज़ह सालते हैं! अब लोग.........
कुछ लोग रिर्श्तो की अर्थी को,
बिला वज़ह कन्धा लगाते हैं,
श्मशान मे दफ़्न होने को पालते हैं!  अब लोग.......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

मंगलवार, 7 जून 2011

समय की धारा

समय की धारा,कितनी अजीब है ?
जो कल तक दूर थे ,आज कितने करीब है !
जिनसे थी नफ़रत ,  ता उम्र मुझको ,
आज वो ही तो,       बन गए   मेरे रकीब है !!समय की धारा .....
किसीको मांगने  से भी मिलता नहीं ,
 कभी बिन माँगे मिला ,वो अपना नसीब है !! समय की धारा ...
रात-दिन जिनके साथ ,बरसों गुज़ारे .
अब उन्ही से मिलाने को ,फूटा यह नसीब है !!समय की धारा ...

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007