रविवार, 12 जून 2011

रिश्ते


अब लोग रिश्तों को कहाँ पालते है?
शादी -ब्याह पर झूठी हँसी बिखेर,
नई कहानी बना जल्द से जल्द ,
घर भागने को प्रथाओं को टालते हैं! अब लोग .........
केवल अपने ही अपने होते है,
बाकी तो केवल सपने होते हैं,
क्योंकि ऐसे रिश्ते बेवज़ह सालते हैं! अब लोग.........
कुछ लोग रिर्श्तो की अर्थी को,
बिला वज़ह कन्धा लगाते हैं,
श्मशान मे दफ़्न होने को पालते हैं!  अब लोग.......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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