समय की धारा,कितनी अजीब है ?
जो कल तक दूर थे ,आज कितने करीब है !
जिनसे थी नफ़रत , ता उम्र मुझको ,
आज वो ही तो, बन गए मेरे रकीब है !!समय की धारा .....
किसीको मांगने से भी मिलता नहीं ,
कभी बिन माँगे मिला ,वो अपना नसीब है !! समय की धारा ...
रात-दिन जिनके साथ ,बरसों गुज़ारे .
अब उन्ही से मिलाने को ,फूटा यह नसीब है !!समय की धारा ...
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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