सूर्य
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अब तो मानव तुमसे,तुमको चुराने चला है!
ऊर्जा का श्रोत तुम, तुम्हे ही मिटाने चला है!!
मानव ने सदैव से ही,प्रक्रति को छला है!
अस्तित्व पर घात करता, भई वाह क्या बला है?
ऊर्जा का कर रहा दोहन,विकास से ही पला है !!
प्रक्रति को मिटाना भी, इसकी एक कला है?
पहले पेड-पौधो से ही,इसका चूल्हा जला है!!
फ़िर धरती के सीने से कोयला-तेल मिला है!
खत्म कर सभी को,अब सौर-ऊर्जा पर पिला है!!
अपनी भूख की खातिर, फ़िर प्रक्रति को तला है!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७
सोमवार, 19 अप्रैल 2010
शनिवार, 17 अप्रैल 2010
किस्मत वाले
बहुत किस्मत वाले होते हैं ,जिनकी मोहब्बत उनके पास होती है !
उनकी सुबह आम सही ,पर रात तो उनकी खास होती है !
उन्हें दूरियों का अहसास ,क्योंकर नहीं होता है ?
गम कोइ भी हो लेकिन,दिल कभी नहीं रोता है !
किसी गम या दर्द का,उनको कभी अहसास होता नहीं !
अपना कोइ पल किसी के,इंतज़ार में वो खोता नहीं !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
उनकी सुबह आम सही ,पर रात तो उनकी खास होती है !
उन्हें दूरियों का अहसास ,क्योंकर नहीं होता है ?
गम कोइ भी हो लेकिन,दिल कभी नहीं रोता है !
किसी गम या दर्द का,उनको कभी अहसास होता नहीं !
अपना कोइ पल किसी के,इंतज़ार में वो खोता नहीं !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010
yaade
यादें
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भूलना चाहो जितना,उतना ही सताती हैं तुम्हारी यादें!
दिन तो कट जाए मगर,सारी रात रुलाती हैं तुम्हारी यादें!!
याद आती है सरे शाम ,तेरे ज़ुल्फ़ों की भीनी खुश्बू,
मस्त कर जाए मगर ,क्यूं दीवाना बनाती है तुम्हारी यादें!! भूलना चाहो....
याद आती है शबे सर्द में, तेरे जिस्म की गर्मी,
मैं पिघल जाऊंमगर, यह तो मोम बनाती है तुम्हारी यादे !!भूलना चाहो.....
याद आती है तेरी नम आखों से,अश्कों की लडी,
पी तो जाऊं मैं मगर, यह तो प्यास बढाती है तुम्हारी यादें भूलना चाहो .....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
साम्प्रदायिक सदभाव ---------------------
साम्प्रदायिक सदभाव
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साम्प्रदायिक सदभाव का समन्दर इतना गहरा नही,
डरते हैं लोग वे,जिन्होने कभी इस्मे तैरा नही !
प्यार और मोहब्बत के गोतखोरों को कोइ एतराज़ नही,
पंडित औ मुल्ला क्यों टांग अडाते,उन्के बाप का राज़ नही!
संगीन के साये में हमने , कई साल गुज़ारे है,
हम आपस मे लडते रहें,तभी तो उन्के पौवारे हैं!
खुशी होती है,जब हम आपस मे बैठ हुक्का गुड्गुडाते हैं,
यह बात उन्हे रास आती नही,इसीलिये हमे लडाते हैं!
जिनके लिये "औरत केवल बच्चा पैदा करने की मशीन है"
वे कम्ज़र्फ़ हैं,पढ्ने- पढाने से डरते हैं,और वाकई कमीन हैं!
औरत ,मां -बहन और बेटी बन ,घर को सजाती,सेवारती है
हमारे मज़हब मे तो वो,देवीहै ,पूजा है और आरती है !!
बोधिसत्व कस्तूरिय २०२ नीरव निकुन्ज सिकनदरा आगरा २८२००७
गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
tee vee
टीवी
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प्रेम ,समर्पण और सदाचार,
हो गये-पापड,चटनीऔर अचार!
हर घर,हर चैनल पर पड रही इनको मार,
मात-पिता भी हो गये,अब कितने लाचार!
उनकी बातें घर मे,समझ किसी को नहि आती,
रोडीज़ पर आने को,बहू-बेटी मन ही मन ललचाती!
काश ! राहुल के स्वयंवर मे,मैं भी जा पाती,
बिन शादी के ही, शादी के सारे सुख पा जाती!
एन डी टी वी घट रही थी,जब टी आर पी,
राखी के फ़र्ज़ी स्वयंवर की तैय्यारी कर दी!
शादी के सुख मे,दुख बहुतेरे हैं,
बिन शादी सुख भोगें,नयेचितेरे हैं१
लिव-इन-रिलेशन शिप मे,लाखोंसुख भोग रहे,
रख कन्डोम पर्स मे,एच आई वी को रोक रहे!
अनवान्टेड ७२ से मिल गया,वैश्याव्रत्ति को लाइसैन्स,
घर वाले कुछ बोले तो,कर दे सबको ये साइलैन्स!!
बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
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