शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

साम्प्रदायिक सदभाव ---------------------

साम्प्रदायिक सदभाव
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साम्प्रदायिक सदभाव का समन्दर इतना गहरा नही,
डरते हैं लोग वे,जिन्होने कभी इस्मे तैरा नही !
प्यार और मोहब्बत के गोतखोरों को कोइ एतराज़ नही,
पंडित औ मुल्ला क्यों टांग अडाते,उन्के बाप का राज़ नही!
संगीन के साये में हमने , कई साल गुज़ारे है,
हम आपस मे लडते रहें,तभी तो उन्के पौवारे हैं!
खुशी होती है,जब हम आपस मे बैठ हुक्का गुड्गुडाते हैं,
यह बात उन्हे रास आती नही,इसीलिये हमे लडाते हैं!
जिनके लिये "औरत केवल बच्चा पैदा करने की मशीन है"
वे कम्ज़र्फ़ हैं,पढ्ने- पढाने से डरते हैं,और वाकई कमीन हैं!
औरत ,मां -बहन और बेटी बन ,घर को सजाती,सेवारती है
हमारे मज़हब मे तो वो,देवीहै ,पूजा है और आरती है !!
बोधिसत्व कस्तूरिय २०२ नीरव निकुन्ज सिकनदरा आगरा २८२००७


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