गुरुवार, 20 जनवरी 2011

पि्त्रश्री को श्रद्धान्जलि

पि्त्रश्री को श्रद्धान्जलि




पिता के प्रयाण से यह मन छुब्द्ध है !

स्नेह की अविरल धारा अब अवरुद्ध है!!



संताप के इस समर मे नही कोई साथी?

सत्य का यह प्रष्ठ कितना अछरशः शुद्ध है!! पिता के प्रयाण ....



सिस्कियों से सम्पूर्ण धरा गुंजित हो रही है,

कहीं काग की काँव-काँव तो कहीं गिद्ध है!! पिता के प्रयाण...



कभी-कभी लगता है किसी आहट पर यही,

अभी पुकारेंगे मुझे या शायद अभी क्रुद्ध हैं!! पिता के प्रयाण ....



जीवन-मृत्यु का यह क्रम अवश्य्म्भावी है!

सिद्धार्थ से जन्मा ’बोधिसत्व’कितना प्रबुद्ध है!! पिता के प्रयाण...

सोमवार, 17 जनवरी 2011

गज़ल

गज़ल

तुम जो अपनी घनेरी- ज़ुल्फ़ से, गर कभी शाम कर दो,

कहते हैं खुदा की कसम सरे राह, इक कत्ले-आम कर दो!

देते हैं तुमको मुआफ़ी का हक, नज़रों से बस जाम भर दो!

हम तो शैदाई तेरे प्यार के,बस एक बोसा मेरे नाम कर दो !!

आगोश की नर्म गर्मी मिले,यह अफ़साना सरे आम कर दो!!



गज़ल

आपका अन्दाज़े-मोहब्बत कुछ और है!

आज हम है ,लेकिन कल कोई और है!!

कल तक जो थी,बस तेरे पाँव की जूती!

आज वो ही दीवाने ,तेरे हुए सिरमौर है!!आपका अन्दाज़....

पोशाक की मानिन्द,जो सनम बदले है,

उसका कया कहें, कया कहीं भी ठौर है? आपका अन्दाज़....

पर यह सब ज़माने की हवा ने बदला है,

इसीलिए कहते हैं,नया ज़माना नया दौर है!!आपका अन्दाज़..

आँख से टपकती मोहब्बत,दिल कुफ़्र्ज़दा है,

ऐसे लोगों पर ना जाने क्यूँ,करता तू गौरहै!! आपका अन्दाज़..



बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

मो:९४१२४४३०९३

गुरुवार, 13 जनवरी 2011

badhaaeeya

पोंगल,लोहडी,मकर संक्रान्ति का आया त्योहार!


आप सभी तक पहुँचे लाखों बधाईयां बारम्बार !!

नई फ़सल ,नई उमंग और २०११ का नया वर्ष !

हर मन मे जागा है,कितना उल्लास कितना हर्ष!!

जागी है फ़िर से एक नई उम्मीद एक नया जोश!

कुछ पीकर और कुछ बिन पिये हो रहे हैं मदहोश!!

सबके मन है नया करने, नया दिखाने का ज़ुनून !

नई उडाने है,साथ ही है नई कल्पनाओं का सुकून !!

इतिहास बन गया२०१० का वर्ष और बीती बात गई!

नये संकल्प से जीवन को ,सुखदाई कर डालो भई!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७