
गणतंत्र की कहानी ,तुमको है सुनानी !
स्वतंत्रता की गाथा ,आगे थी बढ़ानी !!
बिन संविधान,होती रहेगी मनमानी !
इसलिए संविधान की,ज़रुरत थी आनी !!
छोटे-छोटे राज्यों की,पहचान थी मिटानी !
एक गणतंत्र बनाने की, सबने थी ठानी !!
अन्य देशों के ,संविधानों का निचोड़ा पानी !
भारतीय संविधान की,छवि उभर के मानी!!
मूल अधिकारों ,नीति-निर्देशक सिद्धांत की,
मंजिल हमको , हर हाल में है पानी !!
स्वंतंत्रता,समानता,सदभाव का बहेगा निर्मल पानी !
सम्रेद्ध ,सुद्रढ़ भारत की ,छवि विश्व में है बनानी !!
२६ जनवरी १९५० को कर संविधान लागू !
नव भारत के निर्माण की लौ थी जलानी !!
बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

