रविवार, 24 जनवरी 2010

गणतंत्र


गणतंत्र की कहानी ,तुमको है सुनानी !

स्वतंत्रता की गाथा ,आगे थी बढ़ानी !!

बिन संविधान,होती रहेगी मनमानी !

इसलिए संविधान की,ज़रुरत थी आनी !!

छोटे-छोटे राज्यों की,पहचान थी मिटानी !

एक गणतंत्र बनाने की, सबने थी ठानी !!

अन्य देशों के ,संविधानों का निचोड़ा पानी !

भारतीय संविधान की,छवि उभर के मानी!!

मूल अधिकारों ,नीति-निर्देशक सिद्धांत की,

मंजिल हमको , हर हाल में है पानी !!

स्वंतंत्रता,समानता,सदभाव का बहेगा निर्मल पानी !

सम्रेद्ध ,सुद्रढ़ भारत की ,छवि विश्व में है बनानी !!

२६ जनवरी १९५० को कर संविधान लागू !

नव भारत के निर्माण की लौ थी जलानी !!

बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

गुरुवार, 21 जनवरी 2010

वसंत



आज भी याद है मुझको मां,तेरा वसंत पंचमी मनाना !


उषा से साँझ तक ,मां सरस्वती के भाज़न गुनगुनाना !!


करती थी तू सरस्वती के ,महा श्रृंगार की तय्यारी !


कभी पुष्पमाला बनाना, कभी रोरी टीका लगाना !! आज भी याद .........


इस पावन पर्व पर ,पुस्तकों को हम पूजते थे !


मां सरस्वती को समर्पण कर ,प्रसाद लगाना !! आज भी याद ........


वासंती -वस्त्र धारण कर ,पुस्तकें रखते उसके समक्ष !


वंदना थी -कर कृपा ताकि पंहुंचे शीघ्र अगले कक्ष !! आज भी याद ......


पर अब न तू है, न वैसा वासंती वसंत !


छोड़ हमको विलीन हो गई ,पा गई अनंत !! आज भी याद ..........


बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिउकंदरा आगरा २८२००७