बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

जिंदगी

ऊबड़- खाबड़ रास्तों पर चलना ही तो ज़िन्दगी है !
तहे दिल से करे कोई सिजदा ,वही तो बंदगी है !!
गमे-राहमें कोई यूंही मिले, और गर बिछुड़ जाये !
फिर उससे मिलने को दिल करे,येही तो तिस्नगी है !!ऊबड़ -खाबड़ ........
राह में साथ चलने की गुज़ारिश करते हैं लाखों ,
पर चंद कदम साथ चलकर ,मुड जाये ,येही तो दिल्लगी है !! ऊबड़ -खाबड़ ......
प्यार करने को बांह में भर ले ,चूम ले -गिला नहीं !
पर प्यार में व्यभिचार करे ,यह ही तो दरिंदगी है !!ऊबड़- खाबड़ .......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा agra282007

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