शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

होली

होलिका का हो दहन ,
भक्त प्रह्लाद का हो स्मरण !
हिरण्य कश्यप का हो मान- मर्दन ,
चारों ओर हो रहा हुरियारों का क्रंदन !
रंगों से सराबोर हो तन-मन ,
झूम उठी बगिया और चमन !
है येही नव संवत्सर का अभिनन्दन'!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा agraa282007

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