बुधवार, 17 मार्च 2010

माया की माया


२०० करोड की भीम नगरीऔर ५ करोड की माला,
मायावती ने किया,आज प्रजातन्त्र का मुंह काला !
लगता है जनसेवक नही,उनके नाम पर अभिशाप है,
दलितों की बातें करती है,पर राजाओं की भी बाप है!
३००० शौचालय लख्ननउ भीम नगरी में बनवाए गए,
और दलितों को कितने ही,स्वप्न-सलोने दिखाए गए!
दलितों को खेतों और सड्कों पर शौच करना पड्ता है,
स्वास्थ से उनके खिलवाड -घूरा उनके द्वार पर सड्ता है!
काश कोई उनकी समस्याओं को उनकी नज़र से देखता,
हर दल दलित वोट बैंक हथिया उस पर रोटी नही सेकता!
समस्याओं को छोड,हर कोई,अपनी-अपनी झोली भर रहा है,
कहांसे आता है इतना पैसा?,बताने से भी हर कोई डर रहाहै!
गरीब दो वक्त की रोटीके लिये ,क्या क्या जुगाड करता है,
तब कहीं जाकर कहीं उसके परिवार और उसका पेट भरता है!
आज उनके रहनुमा ,अगर जरा भी उनकी चिन्ता करते,
तो आज फ़िर कलुआ या कमला,आत्म-हत्या नही करते!!
बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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