दिल की ख्वाहिशों को ,कहां तक अंजाम दूं ?
हँस के मिलती हो ,पता नही इसे क्या नाम दूं !! दिल की.....
मुलाकातें बहुत हो चुकीं हैं अब तलक,
सोचता हूं ,इसे अब कोई मुक्क्मिल मुकाम दूं !! दिल की .........
नज़रों से पिलाए है तुमने,जाम लाखों,
मन मे आता है कि,तुम्हे कोई अच्छा ईनाम दूं !! दिल की........
सब्र का पैमाना छलक जाने से पहले,
हसरत है कि इस दिल को भी, कुछ आराम दूं !! दिल की........
कब से दिल मे अरमां दबाए बैठा हूं ,
तुम कभी हाँ कहोगी,या मैं तुम्हे यह पैगाम दूं !! दिल की......
है तमन्ना इस दिले आशना की यह,
दूर रहो या पास हो, प्यार तुझे सुबह शाम दूं !! दिल की .......
हसरतों की दुनिया मेरी आबाद हो ,
तुम कहो तो अब, एलाने-मुह्ब्बत सरेआम दूं !! दिल की .....
सरफ़िरों ने कर दिया बदनाम तुमको,
हर तरफ़ से आती है सदा,मैं ही तुझे नाम दूं !! दिल की.......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७


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