तेरे इश्क के चर्चे , अब सरे आम हो गये हैं ,
कल तक थे क्च्चे, अब पके आम हो गये है !
तेरी गली के कुत्ते ,जो भौंका किये थे मुझ पर,
अब तो उन्ही मे हम भी, गुमनाम हो गये हैं! तेरे इश्क ........
तुझे कालेज पँहुचा-पँहुचा, थक गया हूं मै भी,
आस्माँ को छूते अब, पैट्रोल के दाम हो गये हैं !तेरे इश्क .....
कभी मिलने का मौसम, बना ही डालो जानम,
अब तो अपने ही घर मे, बदनाम हो गये हैं ! तेरे इश्क .....
शादी के वास्ते पापा से, मिलने का है इरादा,
चक्कर लगा-लगा के,चक्के ही जाम हो गये हैं! तेरे इश्क ....
ग्रहस्थी चलाने के लिये,इक पहिये की है ज़रूरत,
बन जाओ तुम ही खानम, सुबह से शाम हो गये हैं!
तेरे इश्क के चर्चे , अब सरे आम हो गये हैं !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007


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