मंगलवार, 9 नवंबर 2010

कैसो सुन्दर सासरो?

म्हारो कैसो नीको कैसो सुन्दर सासरो?

जाने दियो है मोकूं, जीवन भर को आसरो !

म्हारी कैसी सुन्दर, सुघढ,सलोनी सासू जी?

ना कबहूं डाँटे-डपटें,ना आवन दें वे आँसूजी ! म्हारो......

म्हारी कैसी सुन्दर,सुघढ,सलोनी चाची जी ?

सबकी लेत फ़िरें खबरिया,इते-उते आती जी! म्हारो.....

म्हारी कैसी सुन्दर,सुघढ,सलोनी जेठानी जी?

घूँघटा जो कभी उठावें,भरवा दें सबको पानीजी!म्हारो......

म्हारे कैसे सुन्दर सुघढ ,सलोने देवरा जी ?

ऐसे चमकें-दमकें,जैसे कुन्दन को हो जेवंराजी !म्हारो....

म्हारो कैसे सुन्दर,सुघढ,सलोने बींद जी ?

सारे गाम की महरारू की,उडाय दई है नींदजी !म्हारो....

म्हारो ऐसो नीको,ऐसो सुन्दर सासरो,

अब न मोये ,अम्मा-बापू को आसरो! म्हारो......

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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