पहले खून का रिश्ता होता था ,
अब रिश्तों का खून हो रहा है !
पहले बात होती थी सम्मान की,
अब जमीर ही शून्य हो रहा है !!पहले खून .....
पहले गाँव की लड़की होती थी ,
अब बहन का रिश्ता न्यून हो रहा है!!पहले खून ...
पहले समाज की मर्यादा होती थी,
अब समाज ही शून्य हो रहा है !! पहले खून.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७


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