शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा की धवल चाँदनी,

कह रही इक नयी मधुर रागनी !

रात है क्रष्ण के महारास की ,

गोपियों के मधुमास की !

अम्रत बरस रहा है नभ से ,

करें आचमन लक्छ्मी तप से !

ताज चमक रहा है यूं चमकी,

चाँद की आभा- कान्ति दमकी !

प्रेम-प्रसून हैं मदन मुरारी .

उनको स्म्रत करती राधे प्यारी !

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा २८२००७

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