मंगलवार, 3 मार्च 2009

टीस

मेरे ज़ख्मों को न कुरेदो , इनमे टीस उठती है !
रिश्ते-नातों पर क्या तवज्जो ,इनसे खीज उठती है!!
अख़बार की सुर्खी बनी -बेटे ने मां को दर-बदर कर दिया !
मां ने फ़र्ज़ अदा किया ,बेटे ने दूध का क़र्ज़ बेअसर कर दिया !!मेरे ज़ख्मों को .......
ऐ अहसान-फरामोश !भाई गया तो गया ,कोई गम नही किया !
तूने तो मां को तसल्ली का एक का ख़त ही भी नही दिया !!मेरे ज़ख्मों को.......
तेरी हर शरारत उसे आज तक याद -हंस कर बयां करती है !
तूने उस मां को कैसे भुलाया,नौ माह कोख में रखा करती है !!
मेरे ज़ख्मों को न कुरेदो , इनमे टीस उठती है !
रिश्ते नातों पर क्या तव्वज्जो ,इनसे खीज उठती है !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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