
प्यार के झरोखे से,उसने मुझे धोखे से !
इश्क का पैगाम दिया है,बहुत मौके से !!
आई लव यूं में ,जाने क्या छुपा रखा है ?
मुहब्बत के इन लफ्जों ने, दीवाना बना रखा है !!
आज तो जवानों -बूढों ने गर्मजोशी पाई है !
भूल गए सब,कोई किसी का बहन -भाई है !!
हर कोई किसी, माशूका के चक्कर में है !
इश्क और मुश्क ,आज दोनों टक्कर में है!!
जूते-चप्पल का भी, आज किसी को डर नहीं !
उन्हें शायद पता नही ,बहन उनकीभी आज घर नहीं !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
इश्क का पैगाम दिया है,बहुत मौके से !!
आई लव यूं में ,जाने क्या छुपा रखा है ?
मुहब्बत के इन लफ्जों ने, दीवाना बना रखा है !!
आज तो जवानों -बूढों ने गर्मजोशी पाई है !
भूल गए सब,कोई किसी का बहन -भाई है !!
हर कोई किसी, माशूका के चक्कर में है !
इश्क और मुश्क ,आज दोनों टक्कर में है!!
जूते-चप्पल का भी, आज किसी को डर नहीं !
उन्हें शायद पता नही ,बहन उनकीभी आज घर नहीं !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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