रविवार, 12 अप्रैल 2009

कविता कब बनती है ?

मन जब आह्लादित हो,तब कविता बनती है!
जब मन आह़त हो,तब कविता बनती है !!
जब बारिश में फूल खिले हों ,तब कविता बनती है !
जब अंतस में शूल चुभे हों ,तब कविता बनती है !!
जब प्रेयसी मौन निमंत्रण दे, तब कविता बनती है !
जब प्रेयसी मनसे निष्कासन दे ,तब कविता बनती है !!
जब आंगन में किलकारी गूंजे ,तब कविता बनती है !
जब बेटी बिदा की बारी हो ,तब कविता बनती है !!
जब सावन की बौछार पड़े ,तब कविता बनती है !
जब सीमा पर गोली की मार पड़े,तब कविता बनती है !!
जब मन में उदगार उठे , तब कविता बनती है !
पता नही कब मन में ज्वार उठे ,तब कविता बनती है !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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